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Saturday, July 23, 2022

Mhow to Omkareshwar Train - Special train for Shrawan month

09569 Dr Ambedkar Nagar Mhow  (DADN) - Omkareshwar (OM) Passenger 

Daily special train during the month of Shravan. 

Leaves Mhow (DADN) at 0915, reaches Omkareshwar (OM) at 1135.

Train 09570  leaves Omkareshwar (OM) at 1755 and reaches  Mhow (DADN) at 2015 hours.
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Friday, July 22, 2022

Places to visit nearby Indore

इंदौर में प्राकृतिक स्थल,वाटर फॉल ओर ओर पिकनिक स्पॉट की बहुतायत है ओर ये लगभग 40 से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जो निम्न है:
1 पातालपानी का झरना
2 कालाकुंड घाटी
3 अम्बाझार
4 जूनापानी
5 रालामंडल
6 देव गुराड़िया
7 जोगीया भड़क
8 काली किराय
9 जानापाव
10 चिड़िया भड़क
11 गिडिया खोह
12 गुलावत
13 तिंछा फॉल
14 मोहाड़ी फॉल
15 मेहंदी कुंड
16 बामनिया कुंड
17 चोरल डैम
18 जाम गेट
19 केवडेश्वर,उज्जैनी
20 ओखलेश्वर
21 सिद्धवरकूट
22 जयंती माता बड़ी
23 काटकूट
24 जयंती माता छोटी
25 च्यवन ऋषि आश्रम
26 कश्यप मुनि आश्रम

इनके भी क्या कहने
1 ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग
2 महेश्वर
3 मण्डलेश्वर
4 मांडव
5 उज्जैन
6 देवास
ये सभी 70 से 100 किलोमीटर की रेंज में है।

 इसके अलावा इंदौर में :
1 राजवाड़ा
2 मल्हारी मार्तण्ड मंदिर
3 हरसिद्धि
4 लाल बाग
5 पुरातत्व संग्रहालय
6 चिड़ियाघर
7 छत्रीबाग साई मन्दिर
8 खजराना गणेश मंदिर
9 कांच मंदिर
10 बिजासन माता टेकरी
11 पित्र पर्वत
12 हींकार गिरी और गोम्मट गिरी आदि प्रमुख स्थल है।

अब इंदौर में खाने के लिए कुछ खास .....
लाल बाल्टी की "कचोरी",
विजय चाट का "पेटिस",
सराफा कॉर्नर के "समौसे",
बड़े सराफे की "स्पेशल चाय",
नागोरी की "शिकंजी",
जेन साब का "भुट्टे का किस",
मथुरा वाले की "मावा बांटी" ,
मेघदूत की "भेल",
लालाजी के "भजिये",
छावनी की "दूध जलेबी",
कोर्ट वाली गली की "छोले-टिकिया" ,
गीता भवन के "रसगुल्ले",
कोठारी मार्केट की "भुट्टे की कचोरी",
मल्हारगंज की "भेल",
जेल रोड की "पंजाबी लस्सी",
नेमाजी की "कुल्फी",
जोशी का "दहीबड़ा",
 सराफा में रामा का "सेंडविच",
शीतल की "गजक",
जानी का "हॉट-डॉग",
 चिमनबाग के "कड़ी फाफडे" ,
 सुरेश के हींग के "आलूबडे" , 
 उ डी पी का "मसाला डोसा" , 
छप्पन मधुरम की "रबड़ी" , 
  मरोठीया के "सिके पेड़े"  ,
   सराफा थाने का जैन "फालूदा" , 
   गैलडा वालो की "जलेबी",
   कर्णावद का "भोजन",
   राजहंस के "दाल बाफले",
   पृथ्वीलोक की "थाली",
   ओर गुरुकृपा का "खाना"....
56 दुकान,सराफा,कोर्ट वाली गली , विजय नगर चौपाटी,कनाड़िया रोड यहां खाना खाना ओर सिर्फ खाना...
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Wednesday, April 27, 2022

भयंकर गर्मी में ग्वालियर कि यात्रा

ग्वालियर कि भयंकर गर्मी में यात्रा......
राजा मानसिंह तोमर युनिवर्सिटी ग्वालियर में दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होने का निमंत्रण था।
 तो सोचा चलो परिवार के साथ ही प्लान कर लूं कार्यक्रम भी देख लेंगे और परिवार के साथ ग्वालियर भी घुम लेंगे, ग्वालियर जाने से पहले ही लोकेन्द्र शर्मा अंकल जी जो कि मैरे अच्छे घुमक्कड़ मित्र से बात हो गई थी अंकल जी बड़े जोश के साथ निमंत्रण दिया था और कहा सीधे घर आ जाना लेकिन फिर भी हमने होटल ले लिया था।
सुबह सुबह होटल में चेक इन करके तैयार होकर बढ़े जोश के साथ ग्वालियर का किला घुम्ने निकले किला तो बहुत ही खुबसूरत था लेकिन गर्मी ने हालत खराब कर दी। चिलचिलाती धुप और पसीना कम होने का नाम हि नहीं ले रहे थे। जैसे तैसे दोपहर तक किला घुमा और सीधे होटल आकर बाकी समय ऐसी चलाया और आराम किया शाम तक तो ऐसा लगने लगा कि कहीं हिल स्टेशन पर आ गये है। 
शाम को मौसम ठंडा हुआ तो आसपास मंदिर और बाजार के लिए निकल गये और इसी के साथ एक दिन खत्म हो गया।
दुसरे दिन सुबह से अंकल जी के घर उनसे मिलने चले गए। 
 अंकलजी एवं आंटीजी से मिलकर और उनकी  मेहमान नवाजी से दिल खुश हो गया और ग्वालियर यात्रा यादगार हो गई।
आंटी जी के हाथ का स्वादिष्ट नाश्ता खाकर मज़ा आ गया फिर वहां से फिर रवाना हुए जीवाजी यूनिवर्सिटी के लिए जहां पर दिक्षांत समारोह के लिए हमें जाना था।
और वो पल आ गया जिसकी हमेशा से इच्छा थी कुलपति के हाथो अपनी डिग्री और मेडल लेना जीवन में शायद पहली बार मैंने इतनी पढ़ाई करी थी जिसकी वजह से युनिवर्सिटी में मेरीट लिस्ट मे दुसरे स्थान पर में आया। 
शाम को 7 बजे कार्यक्रम खत्म हुआ और 7.50 पर ट्रेन पकड़ी और इंदौर के लिए रवाना हो गए। तो इस तरह ग्वालियर का यह सफर खत्म हुआ बहुत ही अच्छा और यादगार सफर रहा।
(ग्वालियर में दो चिज़ जो मुझे अच्छी नहीं लगी एक तो वहां कि गर्मी और दुसरा गंदगी , जगह जगह कचरे का ढेर और यातायात व्यवस्था।)
धन्यवाद 🙏
Date : 28 April 2022
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Friday, March 25, 2022

सायकल से कालाकुंड कि सैर

हिम्मत ए मर्दा तो मदद ए खुदा 😃
तो बात कर शाम कि है 5 बजे मन हुआ कि कल रंगपंचमी कि छुट्टी है तो सायकल से कालाकुंड चला जाता हु।
तो फिर जल्दी से बेग पेक किया सायकल पर टेंट बांधा और निकल गया लेकिन 6 बजे तक में आधा सफर भी पुरा नही कर पाया और मुझे अहसास हुआ कि मैं निकलने में थोड़ा लेट हो गया हुं। लेकिन फिर भी पेडल मारता गया और 6.40 तक में घने जंगल तक पहुंच गया और अंधेरा भी हो गया सायकल में लाइट भी नहीं।
मैं अब ऐसी कश्मकश में फस गया कि अब करना क्या है वापस घर चला जाऊं या चलते रहुं । कालाकुंड अभी भी वहां से लग भग 8 किलोमीटर था जो कि कच्चे पहाड़ी रास्ते से होता हुआ जाता है। रास्ते में मुझे एक गांव वाले ने 6 बजे हि बोल दिया था कि आगे मत जाओ जंगल है और जानवरों का खतरा भी लेकिन दिमाग में सिर्फ़ कालाकुंड पहुंचने कि जी़द थी।
रास्ता बहुत हि ज्यादा खराब है मैं बस चलता रहा फिर कालाकुंड के लिए एक बाईक सवार था रहा था मैंने उसे रोका वो मुझे बड़े हि अजीब ढंग से देखा और बोला कि सायकल से इतनी रात में कहा जा रहे हो। मैंने पुरी कहानी बताई फिर उसकी बाइक कि रोशनी में सायकल से जैसे तैसे कालाकुंड पहुच गया।
फिर कालाकुंड पहुंचकर जो खुशी हो रही थी उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। घर से खाना ले गया था वहां खुले आसमान के निचे और विंध्याचल वैली के बिच बेठकर खाना खाना आसमान में तारों को देखना ठंडी हवा को महसूस करना और इन बस के बिच मेरी जो सायकलींग में थकान हुई थी वो गायब हो गयी थी।
रात को चैन कि निंद सोया और सुबह जल्दी उठ कर फिर से सायकल से जंगल कि पगडंडियों से होता हुआ आसपास का पुरा कालाकुंड घुमा।
रेलवे स्टेशन पर कालाकुंड का फेमस कलाकंद भी खाया गाव वालों से बातें करी वहां कि चोरल नदी में नहाया और 10.40 पर ट्रेन में अपनी सायकल रख कर पहुंच गया पातालपानी और फिर वहां से सायकल से महु।
तो इस तरह से मेरी यह एकल सायकल यात्रा बहुत हि रोमांचक और यादगार रही।
Please subscribe my youtube channel and watch complete series of #kalakund
YouTube video 👇

https://youtu.be/81uxtWAtENw 

DOP 21/22 March 2022
Place - Kalakund & Patalpani
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Wednesday, January 5, 2022

नागलवाड़ी शिखरधाम

चलो आज ले चलता हुं आपको नागलवाड़ी जो कि मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा पर एक अत्यंत दर्शनीय और सुंदर स्थान है जो घने जंगल और एक विशाल पहाड़ी पर स्थित है। यह राजपुर तहसील और बढ़वानी जीले में आता है। यह सतपुडा हिल रेंज में स्थित है।  पहाड़ी की चोटी पर एक बहुत प्रसिद्ध भिलत देव (नाग देवता) का मंदिर तीर्थयात्रियों के लिए मुख्य आकर्षण का केन्द्र है। यहां आपको पुरे सालभर अनेक श्रद्धालु मिल जाएंगे लेकिन विशेषतौर पर नागपंचमी पर यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, 
यहां पर निःशुल्क भोजन प्रसादी भी उपलब्ध है जो सुबह 10 से शाम 6 बजे तक मिलती है जहां आप बड़े से डायनींग हाल में बेठकर भर पेट भोजन कर सकते हैं।
कैसे पहुंचें ? 
 By Train 
निकटतम रेलवे स्टेशन खंडवा जंक्शन है।  यह नंगलवाड़ी से 135 किमी दूर है।  साथ ही, इंदौर जंक्शन नंगलवाड़ी से 151 KM दूर है।
By Bus 
नंगलवाड़ी बड़वानी से 57 किमी दूर है और खरगोन से 45 किमी और जुलवानिया से 16 किमी दूर है।

DOP 2 Jan 2021
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Tuesday, November 30, 2021

माॅ चामुंडा और तुलजा भवानी देवास के दर्शन

चलो आज ले चलता हु आपको मां चामुंडा और तुलजा भवानी के दर्शन के लिए देवास।
देवास इंदौर से 41 किलोमीटर मध्यप्रदेश में स्थित एक शहर है।
इस स्थान को देवास टेकरी के नाम से भी जाना जाता है जो कि 52 शक्तीपिठो में सम्मिलित हैं।
सच्चे मन से यहाँ जो भी मन्नत माँगी जाती है, हमेशा पूरी होती है। इसके साथ ही देवास के संबंध में एक और लोक मान्यता यह है कि यह पहला ऐसा शहर है, जहाँ दो वंश राज करते थे- पहला होलकर राजवंश और दूसरा पँवार राजवंश। बड़ी माँ तुलजा भवानी देवी होलकर वंश की कुलदेवी हैं और छोटी माँ चामुण्डा देवी पँवार वंश की कुलदेवी।
टेकरी में दर्शन करने वाले श्रद्धालु बड़ी और छोटी माँ के साथ-साथ भेरूबाबा के दर्शन अनिवार्य मानते हैं। नवरात्र के दिन यहाँ दिन-रात लोगों का ताँता लगा रहता है। इन दिनों यहाँ माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है ।
यहां पर रोप-वे कि सुविधा भी उपलब्ध जीसका शुल्क 120 रुपए है।
यहां मंदिर के बाहर हि मात्र 10 रूपए में भोजन प्रसादी कि सुविधा भी उपलब्ध है जहां आप स्वादिष्ट सात्विक भोजन भरपेट कर सकते हैं जीसकी पर्ची आप वही के काउंटर से प्राप्त कर सकते हैं।
तो आप भी एक बार दर्शन को जरुर जाए और माता का आशीर्वाद लें।
बस इसी तरह आज कि यात्रा यही समाप्त होती है 
जय माता दी 🙏

DOP 19/11/2021
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Thursday, March 4, 2021

सब्जी पुड़ी कि वजह से ट्रेन छुटना

मैरी पिछली पोस्ट " एशवर्या और सलमान मालवा एक्सप्रेस मे"

पर आपका सभी का बहुत प्यार मिला उसके लिए मै आपका बहुत बहुत आभारी हुँ। धन्यवाद

इस बार फिर ट्रेन का एक छोटा सा किस्सा सुना रहा हुँ इसे महसूस किजिए आशा है आपको पड़ने मे अच्छा लगेगा।



तो दोस्तों बात है 2008 कि जब मै और मैरा दोस्त जयपुर घुमने निकले वैसे घुमना तो एक बहाना था दोस्त को कुछ काम था तो वो मुझे साथ ले गया। घर वाले मैरे घुमने को लेकर बड़े परेशान थे लेकिन मै हर किसी न किसी बहाने से निकल हि जाता था।

तो हम दोनों 3 दिनों तक जयपुर घुमे और अब  घर वापसी कि तैयारी थी सही बताऊ तो मैरी घर जाने कि इच्छा नहीं थी । 

उन दिनों आनलाइन समय पता करने का कोई साधन नहीं था फिर न्यूज पेपर कि कटिंग जो कि एक भोजनालय पर थी उसमें समय देखा तो ट्रेन शाम के 5 बजे थी 4:30 पर समय देखा और सिधे ताबड़तोड़ स्टेशन पहुंचे 15 मिनट मे स्टेशन पहुचे भूक अलग सता रही थी लेकिन खाना खाने का समय नहीं मिला स्टेशन पहुचते हि टिकट कि लाइन मे लगे फिर वहां भी 10 मिनट लग गए उतने मे ट्रेन आ गयी लेकिन 2008 मे जयपुर मे बम ब्लास्ट हुआ था  और उसके एक महिने बाद यानी जुन कि भयंकर वाली गर्मी मे हम वहां गये थे । बम ब्लास्ट कि वजह से वहां पुलिस कि कड़ी चेकिंग चल रही थी दोनों एक दुसरे का मुह देखते हुए बस यही सोच रहे थे है भगवान ट्रेन न निकल जाए लेकिन मेरा दोस्त तो ये भी सोच रहा था कि कहीं ये पुलिस वाले अपने को पकड़ कर पुछताछ करने लगे तो ? और वो लाइन से निकल कर बाहर पुलिस वालो को बार बार देख रहा था 😆 तब वहां एक अंकल ने बोला बेटा ट्रेन 20 मिनट रुखेगी ज्यादा जल्दी मत करो अंकल कि बात सुनकर दिल को तसल्ली मिली चेकिंग होने के बाद जैसे तैसे ट्रेन मे जाकर बेठे लेकिन भुक से बुरा हाल था दोस्त बोला भाई तु कुछ खाने को ले आ कुछ खा लेते है। भुक के मारे उसकी शक्ल मुर्झाए हुए गोबी के फुल जेसी हो गई थी।

बैचारे पर तरस खाके मै भी निचे उतर कर निकल गया कुछ लेने हमारी ट्रेन प्लेटफार्म नं 4 पर थी और खाने का सामान प्लेटफार्म नं 1, 2 पर था ... फिर मै प्लेटफार्म नं 1 पर पहुंचा वहाँ गरमागरम पुड़िया तल रही थी मैने 40 रू कि पुड़ी जिसके साथ दो दौना भरकर सब्जी हरी मिर्च और प्याज फ्रि थी (उन दिलो भुक लगने पर सफर मे हम खाना खाते थे चिप्स कुरकुरे नहीं)

 मैरा तो पेकिंग करवाते करवाते हि मुह मे पानी आ रहा था उतनी दैर मे ट्रेन ने अपनी सिटी बजा दि और यहां मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयीं मै ब्रिज कि और भागा प्लेटफार्म नं 1 से 4 तक पहुचते पहुचते ट्रेन ने प्लेटफार्म छोड़ दिया मै जोर जोर से चिल्ला रहा था कोई चेन खिच दो और ट्रेन कि पिछे हाथ मे सब्जी पुड़ी कि थेली लेकर दोड़ रहा था और बस दिलवाने दुल्हनिया ले जाएंगे वाला सिन याद कर रहा था और सोच रहा काश कोई मुझे हाथ दे और अन्दर खिच ले लेकिन एसा हो न सका (यह एक अंधविश्वास है जो कि फिल्मों मे होता है)

 और ट्रेन छुट गई मे जुन कि भयंकर गर्मी (वो भी राजस्थान की) मे पसीने मे लथपत लथपथ ट्रेन को देखता रह गया और ट्रेन मे दोस्त मैरे वियोग मै जोर जोर से रोता रहा लेकिन चेन खिचने कि हिम्मत नहीं कर सका (एक नंबर का रोतलु और डरपोक है)

ट्रेन के जाने के बाद पांच मिनट तक देखता रहा फिर पेट से आवाज आई कि ....भाई जुदाई का गम छोड़ और जल्दी से पार्सल खोल फिर जल्दी से मै प्लेटफार्म पर बेठकर सब्जी पुड़ी खाई और दोस्त के नाम से बची पुडिया कुत्ते को खिलाई 😆 

उसके बाद इन्क्वायरी पर अगली ट्रेन का पुछने गया लेकिन अगली ट्रेन रात को 12 भजे थी अब तो दिमाग के घोड़े द़ौड रहे थे कि अब करना क्या है।

 और बार बार यही खयाल आ रहा था कि काश प्लेटफार्म नं 4 से वो ठंडे भजीये हि खा लेता तो ज्यादा अच्छा होता 😆

सबसे बुरा दोस्त के साथ हुआ टिकट भी मैरे पास और खाना भी यहां तक कि पैसे भी उसकी जेब मे मात्र 50 रुपये थे।

(800 रूपये लेकर जयपुर आये थे 100 मैरे पास बचे थे और 50 उसके पास)

कुछ भी हो भारतीय रेलवे कि बात हि अलग है हर यात्रा मजेदार और आनंददायक होती है।

हर यात्रा मे कुछ रोमांचक होता है....


Note: picture google se लिया है क्योंकि 2008 मे तो हमारे पास मोबाइल भी नहीं हुआ करता था 😆

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